कितनी खुशनसीब हू मैं
कि तुम मिले मुझे राह में
खुश हू मैं कितनी तुम्हे पाकर
बयान कर पाना कितना मुश्किल है
शायद पूरी हुई है कोई चाहत,
मन्नत अधूरी सुन ली गयी है
जो कल तक धडकता था मेरे लिए
आज उस दिल पे तेरा अख्तियार है
चाहे ठोकर मार के दूर कर दे
या सहेज ले उसे अपने वजूद में
आयी एक मीठी सी बयार
संग उड़ने लगा मेरा मन भी
जैसे कोई बंदिश न हो
जैसे खुल के उड़ना चाहता है,नाचना चाहता है
कोई प्यारा सा गीत गुनगुनाना चाहता है शायद
कैसा जादू है तुझमे
साथ समेट ले गये मेरी आरजू
कशिश जो खीच रही मुझे तेरी ओअर
कहती है, हाँ तुम्ही हो मेरी जुस्तजू
एतबार न किया किसी पे आज तक
शायद तुम्हारी ही तलाश थी
तसल्ली है सलामत है दिल मेरा
सम्हाला है किसी नेक नीयत ने
कहना था आज उससे बहुत कुछ
लेकिन न जाने क्यों साँसे रुक सी जाती है
शायद तार जुड़े है तुझसे
ऐ खुदा, इतना नवाज़ दे मुझे
उधर भी कुछ ऐसा ही हाल हो...