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Friday, November 18, 2011

है प्यार मुझे तुमसे बेइंतेहा

इल्तेज़ा है तुम्हारी बाखुदा
इनायत है तुम्हारी बाखुदा
जो अलफ़ाज़ निकलते है दिल से
फ़ना है इश्क में बाखुदा
रहनुमा मेरे,बहार लाये उजड़े चमन में
थी एक मुरझाई सी कलि
दी है नयी ज़िन्दगी तुमने बाखुदा
वज़ह हो तुम,चाहत हो तुम
मंजिल भी तुम हो
हमसफ़र भी तुम्ही हो इस राह के
और आखिरी पड़ाव भी बाखुदा
ये कश्ती चल चुकी है रफ़्तार में
डूब जाये, या पार हो सब तुम्हारे इशारे है बाखुदा
किनारा भी तुम हो और साहिल भी तुम्ही हो बाखुदा
है ख्वाइश एक ही अब खुदा से
हम साथ हो न हो, तुम ख़ुलूस रहो इस जहाँ में
मोहब्बत भी तुम हो  और इबादत भी बाखुदा
है चिराग जल रहा आशिकी का
ज़ब्त है सीने में ज़ज्बात सारे
हमराज़ भी तुम्ही हो, हमदर्द भी बाखुदा
हु शुक्रगुज़ार उस लम्हे की मिले तुम मुझे रहनुमा
काबिज़निशां हो दिल में मेरे
माफ़ करना हर खता मेरी
चाहत भी तुम हो और हमसाया भी तुम हो बाखुदा...

Monday, October 3, 2011

हाँ हो गया है प्यार मुझे


कितनी खुशनसीब हू मैं
कि तुम मिले मुझे राह में
 खुश हू मैं कितनी तुम्हे पाकर
बयान कर पाना कितना मुश्किल है 
शायद पूरी हुई है कोई चाहत,
मन्नत अधूरी सुन ली गयी है 
जो कल तक धडकता था मेरे लिए 
आज उस दिल पे तेरा अख्तियार है
चाहे ठोकर मार के दूर कर दे
या सहेज ले उसे अपने वजूद में
आयी एक मीठी सी बयार
संग उड़ने लगा मेरा मन भी
जैसे कोई बंदिश न हो
जैसे खुल के उड़ना चाहता है,नाचना चाहता है
कोई प्यारा सा गीत गुनगुनाना चाहता है शायद
कैसा जादू है तुझमे
साथ समेट ले गये मेरी आरजू
कशिश जो खीच रही मुझे तेरी ओअर
कहती है, हाँ तुम्ही हो मेरी जुस्तजू
एतबार न किया किसी पे आज तक
शायद तुम्हारी ही तलाश थी
तसल्ली है सलामत है दिल मेरा 
सम्हाला है किसी नेक नीयत ने
कहना था आज उससे बहुत कुछ
लेकिन न जाने क्यों साँसे रुक सी जाती है 
शायद तार जुड़े है तुझसे 
ऐ खुदा, इतना नवाज़ दे मुझे 
उधर भी कुछ ऐसा ही हाल हो...      

Friday, September 30, 2011

sab pta hai tujhe

इस हकीकी ज़िन्दगी में किसी अफसाने ने रंग न भरा
पर ख्वाबो ख्वाब में रौशन चिराग है,
तू मेरा तो नहीं लेकिन हर वक़्त तस्सव्वुर में है तू,
हर पल,हर लम्हा सोचती सिर्फ तुझे
वहम सा है मुझे,पास ही तो है तू
यकीं नहीं कि मुझसे कही दूर है तू
ख्वाबो में गुम,ज़िन्दगी हसीं हो गयी है
क्यों तलाशती है मेरी नज़रे तुझे,
नज़र टकराते ही क्यों पलकें झुक जाया करती है
कितना  दूर है मुझसे,पर कितना पास है तू..
हौले से जो मुस्कुराये तुम
वो हवा छू के गुजरी जो तुझे,आई थी मेरे पास भी
कोई गीत गुनगुना रही थी शायद
खुश थी वो भी कि मिला था आज तू
  कुछ छुपाया तो नही तुझसे
फिर क्यों है ये बेयकीनी,महरूम हु क्यों तेरे इकरार से
जान कर भी सब अनजान क्यों है तू,
बोलो ना सब जानता  है न तू?? 

Tuesday, September 27, 2011

jane kyo...... again

आदत सी हो गयी है मुझे तेरी
बच्ची सी बन जाती हु
हर बात जानना है मुझको
हर बात बताना चाहती हु
हर घडी,हर पल तेरे साथ का समेत लू
कभी बीतने न दू लम्हों को, वक़्त को थामना चाहती हु
रुक जाये वक़्त जब तेरा दीदार हो
सदाए आती है मुझे जो तुने कही भी नहीं
कशिश है तेरे लफ्जों में कोई,
बिखरे सूखे पत्तो से मोती चुनना चाहती हु
तुझसे बिछड़ने का पल उदास कर जाता है
फिर गूंजती है तेरी आवाज़ कही,तेरे पास हु हमेशा
रेत  के कणों की तरह फिसल जायेंगे ये छन
फिर हम साथ होंगे,
भीगी पलकों को पोछकर नए सपने संजोना चाहती हु..
वो चुपचाप मेरी बचकानी बातो को सुनना तेरा
 लाख कर लू बुराइयाँ मैं तेरी
दुसरो से एक लफ्ज़ भी सुनना गवारा नहीं,
फिर से वो ही अलफ़ाज़ आएंगे,
लेकिन हर वक़्त तुझे ही सुनना चाहती हु...  

जाने क्यों

पता नहीं ये क्या है,
कौन सी डोर बांधे है मुझे तुझसे
क्यों लगता है आस पास ही है तू,
देखता कही से मुझे
एक निगाह तुझ पे डाल के  निकल जाती हु
वो दो पल ही सारे ज़माने की खुशिया दे जाते है..
 पता नहीं ये क्या है,
छिटक जाती है चारो ओर खुशिया
सोचती हु जब तुझे दिल के किसी कोने में बैठा है तू
झंकार सी होती है दिल में ,
हर तरफ मोती से बिखर जाते है..
पता नहीं ये क्या है,
  बात करने के लिए बचा नहीं  कुछ भी
लेकिन बाते ख़तम नहीं होती,
सुनना चाहती हु,जी भर के सुनाना चाहती हु
लिखना चाहती हु नगमे छेड़ के दिल के तार को
समझ के मेरी बेचैनी ये टिमटिमाते तारे भी गुनगुना जाते है..
क्यों तेरी हर एक अदा भाती है मुझे
रूठती हु हर छोटी बात पे
क्यों हर बार तेरा मनाना अच्छा लगता है
सुनती हु तुझे कितनी बार
साँसों में घुल के सरगम की तरह बहती है
होती हु तन्हा फिर भी, होंठ हौले से मुस्कुरा जाते है..
तेरी छोटी छोटी बाते सबको बताना
तेरे कहने से पहले सब कुछ समझ जाना
क्यों तेरे साथ न होने पर ढूढती हु तुझे साए की तरह,
छोड़ना नहीं चाहती वो हाथ जो तुने थमाया भी नहीं
जुदा होने के ख्याल भी ग़मज़दा कर जाते है.. 

Tuesday, September 20, 2011

खुशियों की रुखसती

कितनी आसान लगी थी ज़िन्दगी हमें,
दूर बैठकर जब अंदाज़ा लगाया करते थे
मखमली अहसास,रंगीनियों भरे मौसम पुकारा करते थे
अनजान थी इन मुश्किलों से,जो राह में कब से मेरे ही मुन्तजिर थे..
 हौसले पस्त मेरे,चिरागों के मन में भी अँधेरा घर कर गया ..
 ढूढती हू रेत के ज़र्रो में पानी का सोता
खुशियों को छानने की कोशिश में धुल फाकते है अब,
सोचा न था कभी ऐसा भी होगा
आसमान में छाया काला धुआ दामन बदनुमा कर गया..
तफसील की चाहत में मिली है रुस्वाइयाँ हमें,
मोमिन की तरह पिघलते दिल को पत्थर की मूरत कर गया..
ऐसा न था कि हम उन्हें मन नही पाते
 नतीजो के खौफ ने चुप रखा हमें,
तकाजा हमें भी हो चूका है मोहब्बत का 
ग़म सिर्फ हार का नहीं,आज जीत भी ग़मगीन कर गया..
तस्सव्वुर में मेरे साथ चलते थे वो,
आज तो साया भी रुखसत कर गया..

Thursday, May 5, 2011

kambakht ishq

ek arsa hua muskuraye mujhe,
kadam rakha jab is naye parivesh me,
char din ki chandani k sath mukkamal lagi thi zindagi,
kya khabar thi aansuo ke dher par aashiyaa bnane ki zid pe the,
aaye the jab se ae rehnuma tum tasavvur me
khwabo ki tabir se pehle murjha gai kaliya aur dhulak pade kapolo pe do ashq the,
ateet k jhurmut se jhakte wo lamhe fasane ban gaye,
shamein rangeen kabhi shehar khushnuma hua karte the.,
do boond khushiyo ki talash me sagar gamo ka apar mila...


to b continued...