Search This Blog

Tuesday, September 27, 2011

jane kyo...... again

आदत सी हो गयी है मुझे तेरी
बच्ची सी बन जाती हु
हर बात जानना है मुझको
हर बात बताना चाहती हु
हर घडी,हर पल तेरे साथ का समेत लू
कभी बीतने न दू लम्हों को, वक़्त को थामना चाहती हु
रुक जाये वक़्त जब तेरा दीदार हो
सदाए आती है मुझे जो तुने कही भी नहीं
कशिश है तेरे लफ्जों में कोई,
बिखरे सूखे पत्तो से मोती चुनना चाहती हु
तुझसे बिछड़ने का पल उदास कर जाता है
फिर गूंजती है तेरी आवाज़ कही,तेरे पास हु हमेशा
रेत  के कणों की तरह फिसल जायेंगे ये छन
फिर हम साथ होंगे,
भीगी पलकों को पोछकर नए सपने संजोना चाहती हु..
वो चुपचाप मेरी बचकानी बातो को सुनना तेरा
 लाख कर लू बुराइयाँ मैं तेरी
दुसरो से एक लफ्ज़ भी सुनना गवारा नहीं,
फिर से वो ही अलफ़ाज़ आएंगे,
लेकिन हर वक़्त तुझे ही सुनना चाहती हु...  

1 comment: