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Friday, November 18, 2011

है प्यार मुझे तुमसे बेइंतेहा

इल्तेज़ा है तुम्हारी बाखुदा
इनायत है तुम्हारी बाखुदा
जो अलफ़ाज़ निकलते है दिल से
फ़ना है इश्क में बाखुदा
रहनुमा मेरे,बहार लाये उजड़े चमन में
थी एक मुरझाई सी कलि
दी है नयी ज़िन्दगी तुमने बाखुदा
वज़ह हो तुम,चाहत हो तुम
मंजिल भी तुम हो
हमसफ़र भी तुम्ही हो इस राह के
और आखिरी पड़ाव भी बाखुदा
ये कश्ती चल चुकी है रफ़्तार में
डूब जाये, या पार हो सब तुम्हारे इशारे है बाखुदा
किनारा भी तुम हो और साहिल भी तुम्ही हो बाखुदा
है ख्वाइश एक ही अब खुदा से
हम साथ हो न हो, तुम ख़ुलूस रहो इस जहाँ में
मोहब्बत भी तुम हो  और इबादत भी बाखुदा
है चिराग जल रहा आशिकी का
ज़ब्त है सीने में ज़ज्बात सारे
हमराज़ भी तुम्ही हो, हमदर्द भी बाखुदा
हु शुक्रगुज़ार उस लम्हे की मिले तुम मुझे रहनुमा
काबिज़निशां हो दिल में मेरे
माफ़ करना हर खता मेरी
चाहत भी तुम हो और हमसाया भी तुम हो बाखुदा...

1 comment:

  1. uuuuuuuuuuu forced me to change, u know me well.................

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