इस हकीकी ज़िन्दगी में किसी अफसाने ने रंग न भरा
पर ख्वाबो ख्वाब में रौशन चिराग है,
तू मेरा तो नहीं लेकिन हर वक़्त तस्सव्वुर में है तू,
हर पल,हर लम्हा सोचती सिर्फ तुझे
वहम सा है मुझे,पास ही तो है तू
यकीं नहीं कि मुझसे कही दूर है तू
ख्वाबो में गुम,ज़िन्दगी हसीं हो गयी है
क्यों तलाशती है मेरी नज़रे तुझे,
नज़र टकराते ही क्यों पलकें झुक जाया करती है
कितना दूर है मुझसे,पर कितना पास है तू..
हौले से जो मुस्कुराये तुम
वो हवा छू के गुजरी जो तुझे,आई थी मेरे पास भी
कोई गीत गुनगुना रही थी शायद
खुश थी वो भी कि मिला था आज तू
कुछ छुपाया तो नही तुझसे
फिर क्यों है ये बेयकीनी,महरूम हु क्यों तेरे इकरार से
जान कर भी सब अनजान क्यों है तू,
बोलो ना सब जानता है न तू??
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