आज फिर वही दिन आया है
लाया है फिर वही निराशा
तोड़ दिया जिसने मेरे अरमानो
उम्मीदों का साया
क्या हुई खता मुझसे
मिल रही क्यों सजा मुझको
देख लिया ख्वाब अगर
गुनाह तो नहीं किया है
आज फिर वही दिन आया है.
टूटती तो नहीं मेरी आशाएं
मेरा विश्वास कभी
शायद है मुझमे ही कोई कमी
तिनके तो नहीं मेरे अरमान, जो थे मेरे साथ
कैसे उड़ा सकता है तूफ़ान
की कुछ भी न लगे हाथ
फिर वही निराशा
जीत भी हार का पैगाम लाया है
आज फिर वही दिन आया है
दे रही खुद को दिलासा
क्या टूट जोगी तुम स्वतः
मान लोगी हार इतनी जल्दी
क्या नहीं यकीं खुद पर या उस पर
साँसों को तोड़कर क्या अरमानो से पार पाना आसान है इतना
आया है एक नया सूरज
लाया है उम्मीदों भरा उजाला
उठो देखो नहीं फिर वही दिन आया है...
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